69000शिक्षक भर्ती आदेश , पढ़े विस्तार से

69000-®-शिक्षक भर्ती आदेश , पढ़े विस्तार से

कुछ लोग 67867 की चयन सूची को रद्द बता रहे…

(सूची को रद्द न करते हुए उसे रिविजिट किया जाए…रिविजिट करने का कारण दोहरा आरक्षण को रखा गया है,एक बार जिन्होंने ATRE परीक्षा मे आरक्षण ले लिया है उन्हे चयन सूची बनाते समय आरक्षित वर्ग मे हि रखा जाए उन्हे अनारक्षित पद पर नही रखा जाएगा)

6800 चयन सूची को रद्द कर दिया गया है।

(इस चयन सूची का कोई वैधानिक आधार नहीं सिद्ध हो पाया।)

चयनित को न छेड़ता हुए 3 माह के अंदर पुनः लिस्ट विधि सम्मत संसोधित करेगी सरकार।

हाई कोर्ट लखनऊ

69000 शिक्षक भर्ती पर सुप्रीम आर्डर

पूरी लिस्ट फिर से बनेगी , जो बाहर होगा उस पर सरकार पालिसी के तहत निर्णय ले,6800 लिस्ट रद्द,3 माह में पूरी प्रक्रिया करने का निर्देश

6800 बहुप्रतीक्षित आदेश

⛔️ दोहरा आरक्षण खारिज

👉 6800 रद्द

67867+6696 सूची को 3 महीने में पुनरीक्षण कीजिये।

जो सहायक अध्यापक कार्य कर रहे हैं उनको बिना डिस्टर्ब किए

💐

69000 शिक्षक भर्ती उच्च न्यायालय एकल पीठ :–

6800 की सूची रद्द , ATRE में जिन्होंने आरक्षण का लाभ लिया है, उन्हें पुनः आरक्षण का लाभ नहीं, 69000 की दोनों चयन सूचियों को आरक्षण नियमावली के प्रावधानों के अनुसार रिवाइज करें इस कार्य के होने तक कार्यरत शिक्षकों को डिस्टर्ब नहीं किया जायेगा । तीन माह के अंदर 69000 की नई चयन सूची तैयार करे विभाग , जो वर्तमान में चयनित चयन सूची में न आये उस पर नियमावली के प्रावधानों के अनुसार राज्य सरकार निर्णय ले।

69000 शिक्षक भर्ती– 6800 बहुप्रतीक्षित आदेश

6800 बहुप्रतीक्षित आदेश


⛔️ दोहरा आरक्षण खारिज
 6800 रद्द
67867+6696 सूची को 3 महीने में पुनरीक्षण कीजिये।
जो सहायक अध्यापक कार्य कर रहे हैं उनको बिना डिस्टर्ब किए

C/P

Big Breaking:- 69000 Assistant Teacher Recruitment :भर्ती में आरक्षण प्रक्रिया में विसंगति से प्रभावित आरक्षित वर्ग के लगभग 6 हजार अभ्यर्थियों की होगी भर्ती, इसके अतिरिक्त 17 हजार रिक्त पदों पर की जाएगी नयी भर्ती

69000 Assistant Teacher Recruitment :- भर्ती में आरक्षण प्रक्रिया में विसंगति से प्रभावित आरक्षित वर्ग के लगभग 6 हजार अभ्यर्थियों की होगी भर्ती, इसके अतिरिक्त 17 हजार रिक्त पदों पर की जाएगी नयी भर्ती

69,000 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया में जनपदवार अनारक्षित श्रेणी , अन्य पिछड़ा वर्ग , अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के मामले में सरकार का प्रेस नोट, देखें सारी डिटेल्स👇

69,000 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया में जनपदवार अनारक्षित श्रेणी के 34,589, अन्य पिछड़ा वर्ग के 18,598, अनुसूचित जाति के 14,459 व अनुसूचित जनजाति के 1,354 पद थे।

69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति पा चुके अभ्यर्थी हुए पूर्णतया सुरक्षित, सरकार को मिली कोर्ट में यह अहम जीत

परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति पा चुके 69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्त सभी शिक्षकों की नियुक्ति से संकट अब हमेशा के लिए टल गया है क्योंकि परीक्षा कराने वाली संस्था को कोर्ट से उत्तर कुंजी विवाद पर बड़ी जीत मिली है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आंसर की पर दायर समस्त याचिकाओं को एक सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आजकल संस्थाओं द्वारा जारी आंसर की को चुनौती देना एक फैशन सा बन गया है जैसे ही परीक्षा संस्था उत्तर कुंजी जारी करती है उस पर बिना वजह याचिकाएं दायर कर दी जाती हैं ऐसा ही 69000 शिक्षक भर्ती के मामले में हुआ है साथ ही कोर्ट ने परीक्षा संस्था को आगे की परीक्षाओं में प्रश्नोत्तरी तैयार करने में अधिक सतर्कता बरतनी को कहा है।

69000 शिक्षक भर्ती पर इन्हीं विवादों के चलते आज तक पूर्ण पदों पर भर्ती नहीं हो पाई है। अब तक तकरीबन मात्र 64000 पदों पर नियुक्तियां की गई हैं सरकार को मिली इस जीत के बाद अब अगले चरण की तीसरी काउंसलिंग कराने का विचार है जिसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं जल्द ही तीसरी काउंसलिंग करा कर शिक्षकों को नियुक्ति दे दी जाएगी।

69000 शिक्षक भर्ती में 70% आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी, बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को दिए जवाब में तथ्य आये सामने, 04 दिसम्बर को होनी है अहम सुनवाई

69000 शिक्षक भर्ती में 70% आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी, बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को दिए जवाब में तथ्य आये सामने, 04 दिसम्बर को होनी है अहम सुनवाई

परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत 29 फीसदी सीटों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। सबसे अधिक 45.80 प्रतिशत सीटों पर अन्य पिछड़ा वर्ग ( ओबीसी ) 23.49 प्रतिशत सीटों पर अनुसूचित जाति, जबकि अनुसूचित जनजाति के मात्र .36 (दशमलव तीन छह प्रतिशत) अभ्यर्थियों का सेलेक्शन हुआ है। यानि कुल 69.64 या 70 प्रतिशत अभ्यर्थी आरक्षित जबकि 28.70 फीसदी सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी हैं। 

बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को दिए जवाब में ये तथ्य सामने आए हैं। इस शिक्षक भर्ती में आरक्षण की अनदेखी मामले की सुनवाई आयोग के नई दिल्‍ली कार्यालय में 4 दिसंबर को होनी है। 69000 पदों में 34500 पद अनारक्षित वर्ग के लिए निर्धारित थे। आयोग में दाखिल जवाब के अनुसार सामान्य वर्ग के 19805,ओबीसी के 31605, एससी के 16212 जबकि एसटी वर्ग के मात्र 245 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। 

एसटी वर्ग के पर्याप्त अभ्यर्थी नहीं मिलने के कारण इस कैटेगरी के लिए आरक्षित पदों में से 1133 खाली रह गए। बड़ी संख्या में ओबीसी और एससी वर्ग के अभ्यर्थियों ने हाई मेरिट हासिल की जिससे उनका चयन भी नियमानुसार अनारक्षित वर्ग में हुआ।

68500 की पहली लिस्ट में 62% थे आरक्षित वर्ग के इससे पहले 2018 में शुरू हुई 68500 सहायक अध्यापक भर्ती की पहली लिस्ट में 62 प्रतिशत अभ्यर्थी आरक्षित वर्ग के थे। 13 अगस्त को घोषित परिणाम में 41566 अभ्यर्थी सफल हुए थे। तत्कालीन अपर मुख्य सचिव डॉ . प्रभात कुमार ने अपने ट्वीट के माध्यम से जानकारी दी थी कि 41566 अभ्यर्थियों में से 15772 (37 .95 या 38 प्रतिशत) सामान्य, 19168 (46 .12 या 46 प्रतिशत) ओबीसी, 6616 (15.92 या 16 फीसदी) एससी/एसटी वर्ग के अभ्यर्थी थे।

मई में घोषित नतीजों के आधार पर ही होगी 69000 शिक्षकों की भर्ती, कटऑफ पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर : अगले माह तक हो जाएगी सभी की नियुक्ति

मई में घोषित नतीजों के आधार पर ही होगी 69000 शिक्षकों की भर्ती, कटऑफ पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर: अगले माह तक हो जाएगी सभी की नियुक्ति

69 हजार सहायक अध्यापकों के पद पर इस साल मई में घोषित नतीजों के आधार पर भर्ती करने की अनुमति दे दी है। जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता बाली पीठ ने बुधवार को इस पद पर चयन के लिए कटऑफ अंक को बरकरार रखने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज कर दिया। इनमें से एक याचिका उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने दायर की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया कि कटऑफ बढ़ने के कारण भर्ती परीक्षा में विफल रहे शिक्षामित्रों को अगली भर्ती परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया जाएगा। कोर्ट ने सरकार को इस संबंध में रूपरेखा तैयार करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि कटऑफ बढ़ाने का फैसला गैरकानूनी है। साथ ही बीएड छात्र सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल होने की पात्रता नहीं रखते। बीएड उम्मीदवारों ने छह महीने के ब्रिज कोर्स को पूरा नहीं किया है, जो सहायक शिक्षक के लिए जरूरी पात्रता है। उन्हें केवल प्रशिक्षु शिक्षकों के रूप में भर्ती किया जा सकता है। वहीं, यूपी सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और वकील राकेश मिश्रा की ओर से कहा गया कि कटऑफ में बढ़ोतरी करना कहीं से गलत नहीं है। भले ही ऐसी परीक्षा प्रक्रिया बीच में क्‍यों न की गई हो। उनकी ओर से इस संबंध में पूर्व के कई आदेशों का हवाला भी दिया गया था। सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया

36,590 पदों पर भर्ती का रास्ता साफ 
इस भर्ती में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 सितंबर को 31,661 पदों को एक हफ्ते में भरने का निर्देश दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बाकी बचे हुए 36,590 पदों पर भर्ती का रास्ता भी साफ हो गया। इन पदों पर सरकार की मौजूदा कटऑफ 60/65 के आधार पर भर्ती होगी।

सीएम योगी ने किया फैसले का स्वागत लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग को भारत निर्वाचन आयोग की अनुमति लेकर चयनित अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के फैसले पर मुहर लगाई है । ऐसे शिक्षामित्र जिन्हें मौका नहीं मिला है उन्हें सरकार की ओर से एक अवसर और दिया जाएगा।

अगले माह तक हो जाएगी सभी की नियुक्ति विधान परिषद चुनाव के कारण लागू आचार संहिता के मद्देनजर इंतजार प्रदेश में विधान परिषद चुनाव के कारण लागू आचार संहिता के मद्देनजर बेसिक शिक्षा विभाग ने भारत निर्वाचन आयोग से मंजूरी लेकर नवंबर के अंत या दिसंबर में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की तैयारी शुरू कर दी है।


कटऑफ : सामान्य के लिए 65% आरक्षित के लिए 60% बरकरारशिक्षामित्रों व अन्य ने यूपी सरकार के सात जनवरी, 2019 के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा, 2019 में  कटऑफ को सामान्य श्रेणी के लिए 65 फीसदी और आरक्षित श्रेणी के लिए 60 फीसदी तय किया गया था। पहले यह कटऑफ 45 और 40 फीसदी थी। हाईकोर्ट ने उनकी याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

सरकार ने मानी 69000 शिक्षक भर्ती की 31277 चयन सूची में हैं विसंगतियां, समझिये पूरा मामला

सरकार ने माना – 69000 शिक्षक भर्ती की 31277 चयन सूची में हैं विसंगतियां, समझिये पूरा मामला

31,277 अभ्यर्थियों की चयन सूची में हैं विसंगतियां, एनआइसी की जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही


69000 शिक्षक भर्ती के अंतर्गत 31277 शिक्षकों की नियुक्ति फौरी, हो सकेगा बदलाव, प्रत्येक की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अधीन

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा- 2019 में 31 हजार 277 पदों पर हो रही चयन व नियुक्ति प्रक्रिया फौरी है व पुनरीक्षण के अधीन है। सरकार की ओर से यह जवाब एक अभ्यर्थी की याचिका पर दिया गया जिसमें याची से कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया जबकि अभ्यर्थीको अधिक अंक मिलने के बावजूद चयन सूची से बाहर कर दिया गया है। वहीं सरकार की ओर से यह भी बताया गयाकि इस सम्बंध में एन आईसी द्वारा जांच की जा रही है और जांच का परिणाम आने पर इस प्रकार की गड़बड़ियों को दूर कर लिया जाएगा। 

सरकार के इस आश्वासन के बाद न्यायालय ने किसी अन्य आदेश को पारितकरने की आवश्यकता नहीं पाई। न्यायमूर्ति मनीष कुमार की एकल सदस्यीय पीठ ने कहा कि सरकार के उक्त आश्वासन के पश्चात याची व इस प्रकार के अन्य अभ्यर्थियों के अधिकार व हित को सुरक्षित करने के लिए किसी अन्य आदेश की आवश्यकता नहीं है। दरअसल याची पंकज यादव की ओर से दाखिल उक्त याचिका में कहा गया कि उसे 71.1 अंक मिले जबकि उससे कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया व उसे चयन सूची में जगह नहीं मिली। याचिका में ऐसे एक अभ्यर्थी का उदाहरण भी दिया गया जिसे 68.78 अंक मिलने के बावजूद काउंलिंग के लिए बुलाया गया। कहा गया कि दरअसल कुल 69 हजार पदों पर भर्ती की जानी थी लेकिन सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शिक्षामित्रों के लिए 37 हजार 339 पदों को सुरक्षित रखने के आदेश के बाद 31 हजार 277 पदों पर ही भर्ती की जानी है।

प्रत्येक की नियुवित सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अधीनयाचिका के जवाब में राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता का कहना था कि इस मामते में प्रत्येक नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम आदेशों के अधीन है क्योंकि वहां एक विशेष अनुमति याचिका में कट ऑफ मार्क्स और शिक्षामित्रों को समायोजित किये जाने का मुद्दा विचाराधीन है। सरकारी अधिवक्ता ने आगे कहा कि अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को नजरंदाज कर के कम अंक वालों को नियुक्ति देने का प्रश्न ही नहीं उठता। यदि किन्हीं मामलों में हो जाता है तो अधिक अंक वाले अभ्यर्थी को फ्रेश काउंसलिंग के लिए बुलाया जाएगा व कम अंक वाले की चयन व नियुक्ति रद्‌ कर दी जाएगी। हालांकि यह भी कहा गया कि उक्त विसंगतियों को लेकर एनआईसी द्वारा जांच की जा रही है, जांच परिणाम आने के पश्चात इन्हें ठीक कर लिया जाएगा।

लखनऊ। यूपी सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में सोमवार को स्वीकार किया कि सहायक शिक्षक भर्ती-2019 की चयन सूची में बिसंगतियां हैं। सरकार ने कोर्ट से यह भी कहा कि बिसंगतियों को लेकर नेशनल इन्फॉर्मेशन सेंटर (एनआईसी ) से जवाब मांगा गया है। एनआईसी का जवाब मिलने के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी। सरकार की तरफ से कहा गया कि 31,277 पदों पर भर्तियों का सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन एसएलपी में पारित आदेश के तहत पुनरावलोकन किया जा सकता है। 

न्यायमूर्ति मनीष कुमार ने सरकार द्वारा जवाब दाखिल किए जाने के बाद कहा कि याची पंकज यादव की याचिका पर कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। याचिका में कहा गया था कि अधिक अंक पाने के बावजूद याची का नाम चयन सूची में नहों है। याची की दलील थी कि ओबीसी श्रेणी में उसका क्वालिटी प्वाइंट मार्क्स 71.1 फीसदी है, पर उसे काउंसिलिंग के लिए नहीं बुलाया गया। वहीं, 68.78 फीसदी वालों को इसके लिए बुलाया गया। राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रणविजय सिंह ने कहा कि कम अंक पाने बाले अभ्यर्थी को नियुक्ति देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। अगर कोई गलती हुई है, तो उसे सुधारा जाएगा।

यह है मामला : परिषदीय स्कूलों में 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में सोमवार कोर्ट के 21 मई के पर राज्य सरकार ने 31,661 पदों पर चयनितों की सूची जारी करने का आदेश दिया था। इसके बाद बेसिक शिक्षा परिषद ने 31,277 पर्दो पर अभ्यर्थियों का अनंतिम रूप से चयन कर उनको जिलों में भेज दिया।

लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में सोमवार को राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि सहायक शिक्षक भर्ती-2019 भर्ती की चयन सूची में विसंगतियां हैं। साथ ही कहा कि इस विषय में एनआइसी से जवाब-तलब किया गया है, जिसका जवाब आने पर कार्यवाही की जाएगी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने ये भी स्पष्ट किया कि 31,277 पदों पर भर्तियां फौरी हैं और इनका सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन एसएलपी में पारित आदेश के तहत पुनरावलोकन किया जा सकता है। राज्य सरकार द्वारा जवाब दाखिल किए जाने के बाद जस्टिस मनीष कुमार की एकल पीठ ने कहा कि पंकज यादव द्वारा दाखिल इस याचिका पर कोई भी आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। याचिका में कहा गया था कि बेसिक शिक्षक भर्ती-2019 में उससे कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया है, जबकि अधिक अंक होते हुए भी उनका नाम 24 सितम्बर, 2020 को घोषित की गई चयन सूची में नहीं है और न ही काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया है।

दरअसल याची के अधिवक्ता का आरोप था कि ओबीसी कैटेगरी में याची के क्वालिटी प्वाइंट मार्क्‍स 71.1 प्रतिशत हैं किन्तु उसे काउंसिलिंग के लिए नहीं बुलाया गया है जबकि 68.78 प्रतिशत अंक पाने वालों को बुलाया गया है जो कि सरासर मनमाना व गलत है। वहीं राज्य सरकार की तरफ से पेश अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रणविजय सिंह ने कहा कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थी को नियुक्ति देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। यदि कहीं कोई गलती हुई है, तो उसे सुधारा जाएगा।

टी ई टी 2018 के संसोधित अंक नियुक्ति में मान्य

🔴69000 शिक्षक भर्ती : सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने सभी बीएसए को दिए निर्देश

🔴हाइकोर्ट के आदेश के अनुपालन के में संसोधित किये थे अंक

69000 शिक्षक भर्ती:- फिर फस जाएगी शिक्षक भर्ती, कोर्ट के इन आदेशों को दरकिनार कर जारी किया गया शेड्यूल

69000 शिक्षक भर्ती:- फिर फस जाएगी शिक्षक भर्ती, कोर्ट के इन आदेशों को दरकिनार कर जारी किया गया शेड्यूल