10% आरक्षण के लिए आया परिसंपत्ति प्रमाण पत्र बनाने की अड़चन दूर,शासन ने दो प्रोफॉर्मा तैयार कर जिलाधिकारियों को भेजें

संविधान पीठ जा सकता है सामान्य वर्ग का 10 फीसदी आर्थिक आरक्षण का मामला: सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार

संविधान पीठ जा सकता है सामान्य वर्ग का 10 फीसदी आर्थिक आरक्षण का मामला: सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार

संविधान पीठ जा सकता है सामान्य वर्ग का 10 फीसदी आर्थिक आरक्षण का मामला: सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार
संविधान पीठ जा सकता है सामान्य वर्ग का 10 फीसदी आर्थिक आरक्षण का मामला: सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार

एक फरवरी या उसके बाद की भर्तियों में आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का योगी सरकार ने जारी किया आदेश, पढें पूरी ख़बर

एक फरवरी या उसके बाद की भर्तियों में आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का योगी सरकार ने जारी किया आदेश

एक फरवरी या उसके बाद की भर्तियों में आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का योगी सरकार ने जारी किया आदेश
एक फरवरी या उसके बाद की भर्तियों में आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का योगी सरकार ने जारी किया आदेश

एक फरवरी से गरीबी के आधार पर मिलेगा सवर्णों को आरक्षण का लाभ, अपर मुख्य सचिव कार्मिक ने सभी विभागों को अमल करने के दिये निर्देश, देखें पूरी ख़बर

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सवर्ण आरक्षण में उम्र को नहीं मिली छूट, युवाओं ने पीएम को पत्र लिखकर की शिकायत

सवर्ण आरक्षण में उम्र को नहीं मिली छूट, युवाओं ने पीएम को पत्र लिखकर की शिकायत

सवर्ण आरक्षण में उम्र को नहीं मिली छूट, युवाओं ने पीएम को पत्र लिखकर की शिकायत
सवर्ण आरक्षण में उम्र को नहीं मिली छूट, युवाओं ने पीएम को पत्र लिखकर की शिकायत

सवर्ण आरक्षण में उम्र की नहीं मिली छूट, प्रधानमंत्री से की शिकायत

सवर्ण आरक्षण कानून में उम्र को लेकर छूट नहीं दी गई है। एक फरवरी को केंद्र सरकार के डीओपीटी विभाग द्वारा कानून सार्वजनिक करने के बाद ये जानकारी मिली है। जिसे लेकर अब युवाओं ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। छात्र केंद्र सरकार से ओबीसी वर्ग की भांति तीन वर्ष आयु में छूट की मांग कर रहे हैं। इन्हीं में से कुछ युवाओं ने ऑनलाइन आरटीआई को भी सार्वजनिक किया है, जिसमें डीओपीटी विभाग का उम्र में छूट से साफ इंकार किया है।     

दिल्ली के मुनिरका निवासी त्रिनेत्र सिंह यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। त्रिनेत्र का कहना है  अभी तक देश में ऐसा पहली बार है जब किसी आरक्षण के तहत आयु छूट का प्रावधान न हो। उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिख इसकी शिकायत भी की है।

उन्होंने बताया कि आरक्षण कानून आने के बाद युवाओं को एक उम्मीद दिखी थी, लेकिन कानून के छोटे छोटे प्रावधान अब सामने आने के बाद सच्चाई पता चल रही है। अगर जल्द ही ये राहत सरकार ने नहीं दी तो इस कानून का लाभ युवाओं को नहीं मिल सकेगा। इनकी मानें तो आयु सीमा में छूट न मिलने से उल्टा इस कानून का नुकसान उन्हें होगा।

10 फीसदी आरक्षण के केंद्र सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का रोक लगाने से एक बार फिर से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य वर्ग के गरीबों को नौकरी व शैक्षणिक संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण संबंधी केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। यह दूसरी बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस पर रोक नहीं लगाएगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ शुक्रवार को तहसीन पूनावाला की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें संशोधित अधिनियम की वैधता को चुनौती दी गई है। 
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील राजीव धवन ने पीठ से कहा कि 10 फीसदी आरक्षण के बाद आरक्षण 50 फीसदी से बढ़ जाएगा। उल्लेखनीय है कि एम नागराज मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी निर्धारित की थी। धवन ने अंतरिम राहत की गुहार लगाई, जिसे पीठ ने ठुकरा दिया, लेकिन इस मामले पर जल्द सुनवाई के लिए तैयार हो गई।

उल्लेखनीय है कि याचिकाओं में संविधान (103वें) संशोधन अधिनियम-2019 की वैधता को चुनौती दी है, जिसे संसद के दोनों सदनों ने बतौर 124वें संविधान संशोधन विधेयक-2019 के तौर पर पारित कर दिया था। याचिकाओं में कहा गया कि इस संविधान संशोधन में अनुच्छेद 14 (समानता) और 16 (भेदभाव नहीं) पर विचार नहीं किया गया है, जो समानता का मूल तत्व है।

जामिया मिलिया नहीं लागू करेगा सामान्य वर्ग को 10 पर्सेंट आरक्षण

जामिया मिलिया इस्लामिया अपने कॉलेज में आर्थिक आधार पर पिछड़े सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं देगी। यहां ओबीसी को भी कोटे का लाभ नहीं दिया जाता है।

मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मंजूरी दे दी है। यह आरक्षण सरकारी नौकरियों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में दिया जाएगा। केंद्र सरकार की नौकरियों में जहां यह आरक्षण 1 फरवरी से लागू हो गया है। वहीं, आगामी 2019-20 के शैक्षणिक वर्ष शैक्षणिक संस्थानों में भी लागू हो जाएगा। लेकिन जामिया मिलिया इस्लामिया अपने कॉलेज में आर्थिक आधार पर पिछड़े सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं देगी। इसके पीछे की वजह ‘अल्पसंख्यक दर्जा’ बताया गया है।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल की बैठक सोमवार (4 फरवरी) को हुई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि उसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को अपने सीट मैट्रक्स जरूरत और इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को भेजने की आवश्यकता नहीं है। रजिस्ट्रार यूजीसी को सूचित करेंगे कि जामिया में मौजूदा संरचना के आधार पर अपना एडमिशन नोटिस जारी किया जाएगा।

बैठक में शामिल एक सदस्य ने बताया, “हमने पाया कि हमारा संस्थान अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त है। ऐसी स्थिति में ईडब्लूएस कोटा हमारे उपर लागू नहीं होता है। यूजीसी ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि कुछ संस्थान और अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त संस्थान इस नए सिस्टम के तहत नहीं आते हैं। जामिया में पहले से ही ओबीसी कोटा का लाभ भी नहीं दिया जाता है।”

दरअसल, 17 जनवरी को केंद्रीय मानव संसाधान मंत्रालय ने 2019-20 सत्र से ईडब्लूएस कोटा लागू करने के बारे में केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों से पूछा था। संस्थान को 31 जनवरी तक प्रोग्राम के अनुसार सीट मैट्रिक्स और संभावित आर्थिक जरूरतों को बताने को कहा गया था। मंत्रालय के आदेश पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ने 1 फरवरी को डेटा भेज दिया। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय अभी अपने कॉलेजों से डेटा संग्रह ही कर रहा है।

बता दें कि संविधान के 103वें संशोधन में अनुच्छेद 15(6) आता है, जिसके तहत विशेष प्रावधान की अनुमति है। इसमें शैक्षणिक संस्थानों (निजी भी शामिल) में 10 फीसदी तक ईडब्ल्यूएस कोटा देने की बात है। अनुच्छेद 15 (6), 15(5) का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे 2006 में यूपीए-1 ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने के लिए 93वें संविधान संशोधन के जरिए लाई थी।

आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण पर फिलहाल रोक नहीं, संविधान संशोधन की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र को नोटिस

आर्थिक आधार पर आरक्षण के फैसले रर स्टे मांगने पर याचिकाकर्ता को चीफ जस्टिस ने कहा कि हम मामले का परीक्षण कर रहे हैं. सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण के खिलाफ दाखिल याचिका दायर की गई है.

इस मुद्दे पर यूथ फॉर इक्वॉलिटी समेत कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं. सुप्रीम कोर्ट में 124वें संविधान संसोधन को चुनौती दी गई है. इनके मुताबिक आरक्षण का आधार आर्थिक नहीं हो सकता. याचिका के मुताबिक विधयेक संविधान के आरक्षण देने के मूल सिद्धांत के खिलाफ है और यह सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण देने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक 50% के सीमा का भी उल्लंघन करता है. गौरतलब है कि यह विधेयक सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देता है.

 

केंद्रीय नौकरियों में सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण 1 फरवरी से, कौन जारी करेगा प्रमाण पत्र क्या होगी पात्रता देखें👇

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